अन्य पौराणिक कथाओं के अनुसार राधा श्रीकृष्ण से पांच वर्ष बड़ी थी। राधा ने श्रीकृष्ण को पहली बार जब देखा था जबकि उनकी मां यशोदा ने उन्हें ओखल से बांध दिया था। उन्हें देखकर राधा बेसुध सी हो गई थी और उनके प्रेम में पड़ गई थी। उन्हें लगा था कि यह किसी पूर्व जन्म का रिश्ता है। कुछ लोग कहते हैं कि वह पहली बार गोकुल अपने पिता वृषभानुजी के साथ आई थीं तब श्रीकृष्ण को पहली बार देखा था और कुछ विद्वानों के अनुसार संकेत तीर्थ पर पहली बार दोनों की मुलाकात हुई थी। जो भी हो लेकिन जब राधा ने कृष्ण को देखा तो वह उनके प्रेम में पागल जैसी हो गई थी और कृष्ण भी उन्हें देखकर बावरे हो गए थे। दोनों में प्रेम हो गया था।
ब्रह्मवैवर्त पुराण प्रकृति खंड अध्याय 48 के अनुसार और यदुवंशियों के कुलगुरु गर्ग ऋषि द्वारा लिखित गर्ग संहिता की एक कथा के अनुसार एक बार नंदबाबा श्रीकृष्ण को लेकर बाजार घूमने निकले थे। उसी दौरान राधा और उनके पिता भी वहां पहुंचे थे। दोनों का वहां पहली बार मिलन हुआ। उस दौरान दोनों की ही उम्र बहुत छोटी थी। उस स्थान को सांकेतिक तीर्थ स्थान कहते हैं। संकेत का शब्दार्थ है पूर्वनिर्दिष्ट मिलने का स्थान। मान्यता है कि पिछले जन्म में ही दोनों ने यह तय कर लिया था कि हमें इस स्थान पर मिलना है। कहते हैं कि यहीं पर गर्ग संहिता के अनुसार एक जंगल में स्वयं ब्रह्मा ने राधा और कृष्ण का गंधर्व विवाह करवाया था। यहां हर साल राधा के जन्मदिन यानी राधाष्टमी से लेकर अनंत चतुर्दशी के दिन तक मेला लगता है।



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